नेटवर्किंग मार्केटिंग : कितना सच, कितना झूठ / Networking Marketing Kitna Sach Kitna Jhuth by Ujjwal Patni Download Hindi PDF

पुस्तक नाम : नेटवर्किंग मार्केटिंग : कितना सच, कितना झूठ / Networking Marketing Kitna Sach Kitna Jhuth
Book Language : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ : 3 MB
  • कुल पृष्ठ : 175

  • एक प्रेरक प्रशिक्षक और नेटवर्किंग विशेषज्ञ के रूप में, मैंने कई निदेशकों और अग्रणी नेटवर्क मार्केटिंग कंपनियों के शीर्ष नेताओं के साथ बातचीत की। मेरे सेमिनार में 1 मिलियन से अधिक नेटवर्कर्स ने भाग लिया। वर्षों तक कड़ी मेहनत करने के बाद, मैं समझ सका, कि एक व्यक्ति इस प्रणाली में सफल क्यों होता है और दूसरा क्यों विफल होता है? क्यों एक कंपनी बच जाती है और शीर्ष पर पहुंच जाती है जबकि दूसरी कंपनी को दरवाजे बंद करने पड़ते हैं?

    अब मुझे विश्वास है कि यह एक आसान कमाई प्रणाली नहीं है, न ही धन प्राप्ति का कोई शॉर्टकट। यह प्रणाली कड़ी मेहनत और भक्ति की मांग करती है। मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसा मानता हूं।

    नेटवर्कर व्यापार
    को गंभीरता से नहीं लेते मुझे यह कहने में कोई अफसोस नहीं है कि अधिकांश नेटवर्कर एम.एल.ए. को अपना व्यापार ही नहीं मानते । वो इसे एक टाइम पास मानकर प्रवेश करते हैं, टाइम पास की तरह इस व्यापार को करते हैं और उसी तरह इस व्यापार को छोड़कर निकल जाते हैं। एक छोटी सी पान की गुमटी लगाने वाला, केन्टीन लगाने वाला, या कोई अन्य व्यापार करने वाला भी अपने व्यापार को अधिकांश नेटवर्कर की तुलना में अधिक गंभीरता से लेता नेटवर्कर जब चाहते हैं, तब काम करते हैं, जब चाहते हैं तब काम छोड़कर धर बैठ जाते हैं। कुछ लोगों ने आपत्ति ले ली तो निराश हो जाते हैं । कुछ लोगों ने अपमान कर दिया तो व्यापार छोड़ने का निर्णय कर लेते हैं ।
    इसके विपरीत पारंपरिक व्यापार में किसी दिन ग्राहक आए या ना आए, दुकानदार दुकान खोलकर रखता है । ग्राहक माल खरीदे या ना खरीदे, वह ग्राहक से विनम्रता से बात करता है । वह हर जतन करता है जिससे उसकी दुकान चले । पारंपरिक व्यापार में व्यक्ति अपने कार्य को गंभीरता से लेता है और उसके हर पहलू की जिम्मेदारी लेता है ।

    इस पुस्तक के लेखक

    डॉ. उज्जवल पाटनी / Dr. Ujjwal Patni
    + लेखक की अन्य किताबें

    डॉ. उज्जवल पाटनी एक अंतर्राष्ट्रीय लेखक, प्रेरक वक्ता, कॉर्पोरेट ट्रेनर, नेतृत्व कोच और प्रबंधन सलाहकार हैं। उनकी 7 प्रेरक पुस्तकें 12 भारतीय भाषाओं और दो विदेशी भाषाओं में जारी की गई हैं। 18 देशों में उनकी पुस्तकों की 1 मिलियन से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं।

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