मार्क्सवाद का अर्धसत्य / Marxvad Ka Ardhsatya by Anant Vijay Download Free PDF

पुस्तक नाम : मार्क्सवाद का अर्धसत्य / Marxvad Ka Ardhsatya
Book Language : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ : 2 MB
  • कुल पृष्ठ : 256
  • श्रेणी:

    अनंत विजय की पुस्तक का शीर्षक ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ एक बार पाठक को चौंकाएगा। क्षणभर के लिए उसे ठिठक कर यह सोचने पर विवश करेगा कि कहीं यह पुस्तक मार्क्सवादी आलोचना अथवा मार्क्सवादी सिद्धान्तों की कोई विवेचना या उसकी कोई पुनव्र्याख्या स्थापित करने का प्रयास तो नहीं है। मगर पुस्तक में जैसे-जैसे पाठक प्रवेश करता जायेगा उसका भ्रम दूर होता चला जायेगा। अन्त तक आते-आते यह भ्रम उस विश्वास में तब्दील हो जायेगा कि मार्क्सवाद की आड़ में इन दिनों कैसे आपसी हित व स्वार्थ के टकराहटों के चलते व्यक्ति विचारों से ऊपर हो जाता है। कैसे व्यक्तिवादी अन्तर्द्वन्द्वों और दुचित्तेपन के कारण एक मार्क्सवादी का आचरण बदल जाता है। पिछले लगभग एक दशक में मार्क्सवाद से। हिन्दी पट्टी का मोहभंग हुआ है और निजी टकराहटों के चलते मार्क्सवादी बेनकाब हुए हैं, अनंत विजय ने सूक्ष्मता से उन कारकों का विश्लेषण किया है, जिसने मार्क्सवादियों को ऐसे चौराहे पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहाँ यह तय कर पाना मुश्किल हो गया है कि विचारधारा बड़ी है या व्यक्ति। व्यक्तिवाद के बहाने अनंत विजय ने मार्क्सवाद के ऊपर जम गयी उस गर्द को हटाने और उसे समझने का प्रयास किया है। ‘मार्क्सवाद का अर्धसत्य’ दरअसल व्यक्तिवादी कुण्ठा और वैचारिक दम्भ को सामने लाता है, जो प्रतिबद्धता की आड़ में सामन्ती, जातिवादी और बुर्जुआ मानसिकता को मज़बूत करता है। आज मार्क्सवाद को उसके अनुयायियों ने जिस तरह से वैचारिक लबादे में छटपटाने को मजबूर कर दिया है, यह पुस्तक उसी निर्मम सत्य को सामने लाती है। एक तरह से कहा जाये तो यह पुस्तक इसी अर्धसत्य का मर्सिया है।

    बरकती, ममता और फ़तवा
    कोलकाता की एक मस्जिद के कथित शाही इमाम बरकती ने प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया। बरकती ने जिस प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रधानमन्त्री के बारे में अपमानजनक फ़तवा जारी किया, उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगे बैनर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमन्त्री ममता बनर्जी की बड़ी-सी तस्वीर लगी थी। बरकती ने हिन्दी और अंग्रेज़ी दोनों भाषा में अपमानजनक फ़तवा जारी किया। यह मानना मुश्किल है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस की जानकारी कोलकाता पुलिस को नहीं होगी या जिस वक्त देश के प्रधानमन्त्री के ख़िलाफ़ फ़तवा जारी किया जा रहा था उस वक्त वहाँ पुलिस मौजूद नहीं रही होगी। अगर पुलिस को जानकारी थी या पुलिस वहाँ मौजूद थी तो उसको उसी वक्त बरकती के ख़िलाफ़ कार्रवाई करनी चाहिए थी। अगर किसी कारणवश उस वक्त कार्रवाई नहीं हो पायी तो बाद में हो सकती थी जो नहीं हुई। क्या ये मान लिया जाये कि बरकती ने प्रधानमन्त्री के ख़िलाफ़ अपमानजनक फ़तवा
    राज्याश्रय के तहत जारी किया। क्या यह माना जाये कि प्रत्यक्ष न सही, परोक्ष रूप से बरकती के उस क़दम को सूबे की सरकार का समर्थन हासिल था। बरकती और ममता बनर्जी की सियासी नज़दीकियाँ जगज़ाहिर हैं और अपने इस राजनीतिक सम्बन्ध को बरकती सार्वजनिक रूप से ज़ाहिर भी कर चुके हैं। इससे इस बात का
    अन्देशा तो बढ़ता ही है कि ममता बनर्जी के इशारे पर बरकती ने ये काम किया।
    अगर उनके इशारे पर नहीं भी किया तो जिस तरह से पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की उससे तो ये साफ़ पता चलता है कि कहीं न कहीं बरकती इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि प्रधानमन्त्री के ख़िलाफ़ फ़तवा देने के बाद भी उनके ख़िलाफ़ कोई
    कार्रवाई नहीं होगी। इस्लाम में किसी फैसले या फ़रमान को फ़तवा कहते हैं। इसकी एक प्रक्रिया होती है कि कोई भी मुसलमान अपने मज़हबी मसले को लेकर हाकिम के सामने पेश होता है और वो मज़हबी हाकिम उस पर अपना फैसला सुनाता है।
    बरकती के फ़तवे के मसले में भी ये जानना दिलचस्प होता कि प्रधानमन्त्री मोदी को लेकर क्या मज़हबी विवाद था या फिर किसने फ़तवे की अर्जी दी थी…..

    इस पुस्तक के लेखक

    अनंत विजय / Anant Vijay

    अनंत विजय का जन्म 19 नवम्बर 1969 को हुआ। स्कूली शिक्षा जमालपुर (बिहार) में प्राप्त की। भागलपुर विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स (इतिहास) किया, दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट, बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट की शिक्षा प्राप्त की। अनंत विजय की प्रसंगवश, कोलाहल कलह में, लोकतंत्र की कसौटी, बॉलीवुड सेल्फी आदि प्रकाशित कृतियाँ हैं। नया ज्ञानोदय, पुस्तक वार्ता, चौथी दुनिया में स्तम्भ लेखन किया है। न्यूज चैनल में एक दशक से अधिक समय बिताकर इन दिनों दैनिक जागरण में एसोसिएट एडीटर हैं।

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