मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था / Main Pakistan Mein Bharat Ka Jasoos Tha by Mohanalal Bhaskar Download Free PDF

पुस्तक नाम : मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था / Main Pakistan Mein Bharat Ka Jasoos Tha
Book Language : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ : 2.5 MB
  • कुल पृष्ठ : 166

  • मैं पाकिस्तान में भारत का जासूस था – मोहनलाल भास्कर जासूसी को लेकर विश्व की विभिन्न भाषाओँ में अनेक सत्यकथाए लिखी गई हैं, जिनमे मोहनलाल भास्कर नमक भारतीय जासूस द्वारा लिखित अपनी इस आपबीती का एक अलग स्थान है ! इसमें 1965 के भारत-पाक युध्ह के दौरान उसके पाकिस्तान-प्रवेश, मित्रघात के कारण उसकी गिरफ़्तारी और लम्बी जेल-यातना का यथातथ्य चित्रण हुआ है! लेकिन इस कृति के बारे में इतना ही कहना नाकाफी है क्योंकि यह कुछ साहसी और सूझबूझ-भरी घटनाओं का संकलन मात्र नहीं है, बल्कि पाकिस्तान के तत्कालीन हालत का भी ऐतिहासिक विश्लेषण करती है! इसमें पाकिस्तान के तथाकथित भुत्तोवादी लोक्तान्रा, निरंतर मजबूत होते जा रहे तानाशाही निजाम तथा धार्मिक कठमुल्लावाद और उसके सामाजिक-आर्थिक अंतर्विरोधों को उधान्दने के साथ-साथ भारत-विरोधी षड्यंत्रों के उन अन्तराष्ट्रीय सूत्रों की भी पड़ताल की गई है, जिसके एक असाध्य परिणाम को हम ‘खालिस्तानी’ नासूर की शक्ल में झेल रहे हैं! उसमें जहाँ एक और भास्कर ने पाकिस्तानी जेलों की नारकीय स्थति, जेल-अधिकारीयों के अमानवीय व्यव्हार के बारे में बताया है, वहीँ पाकिस्तानी अवाम और मेजर अय्याज अहमद सिप्रा जैसे व्यकी के इंसानी बर्ताव को भी रेखांकित किया है !

    इस पुस्तक के लेखक

    मोहनलाल भास्कर / Mohanlal Bhaskara

    मोहनलाल भास्कर भारत के ऐसे जासूस थे, जिन्होंने देश के लिये अपना खतना तक कर लिया। भारत की तरफ से उन्हें जासूसी के लिये चुना गया, जिसके बाद उनका धर्म परिवर्तन हुआ और वो मोहनलाल भास्कर से मोहम्मद असलम बन गये। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम के बारे में जानकारी हासिल करने के लिये उन्हें पाकिस्तान भेज दिया गया। भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए एक डबल एजेंट के रूप में काम करने वाले उनके एक सहयोगी ने उन्हें धोखा दे दिया, जिसके बाद पाकिस्तान को उनकी असलियत पता चल गई और मोहनलाल को 14 साल के लिये जेल भेज दिया गया। पाकिस्तान की जेल से निकलने के बाद उन्होंने 'एन इंडियन स्पाइ इन पाकिस्तान' नामक एक उपन्यास भी लिखा था।

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