गांधी परिवार – अस्सी के दशक का भारत / Gandhi Parivaar – Assi Ke Dashak Ka Bharat

पुस्तक नाम : गांधी परिवार - अस्सी के दशक का भारत / Gandhi Parivaar - Assi Ke Dashak Ka Bharat
Book Language : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ : 2 MB
  • कुल पृष्ठ : 32

  • इमर्जेन्सी के बाद बनी जनता पार्टी की सरकार गिर गयी थी। इंदिरा गांधी की सत्ता पुनः स्थापित हो चुकी थी।

    देश की जनता के पास कांग्रेस और गांधी परिवार का कोई विकल्प नहीं था। लेकिन समय इस कदर करवटें बदल रहा था कि इस एक दशक में गांधी परिवार के दो मुख्य कर्णधार चल बसे। संजय गांधी की हवाई दुर्घटना में मृत्यु और इंदिरा गांधी की हत्या ने सभी समीकरण बदल कर रख दिए। क्या देश एक नया विकल्प, एक नया नेतृत्व तलाशेगा? क्या गांधी परिवार दो फाँक में बाँट जाएगी? क्या कल की राजनीति आज का भेद खोलेगी? क्या जनता पार्टी की सरकार किसी और रूप में पुनः लौटेगी? क्या भारत का सबसे युवा प्रधानमंत्री उसी नियति का शिकार होगा, जिसका शिकार अमेरिका का संबसे युवा राष्ट्रपति हुआ था?

    अस्सी का दशक देश की राजनीति का एक रहस्यमय दशक है, जिसे हम जान कर भी अक्सर भूल जाते हैं। लेकिन, इतिहास आख़िर भेष बदल कर लौटता है। आने वाले कल की ग़लतियाँ बीते हुए कल के पन्नों में छुपी होती हैं। और भविष्य की रोशनी भी कहीं दूर इतिहास के गलियारों से आती है। उन्हीं चिराग़ों और उन्हीं पन्नों को तलाशेंगे इस किताब के बहाने।

    Bonzuri Bytes (बोंज़ुरी बाइट्स) प्रस्तुत करता है एक नयी और रोचक इतिहास शृंखला- लोटस (Lotus)!

    मुख्य अंश

    ★ संजय गांधी की मृत्यु Sanjay Gandhi Death

    ★ राजीव और सोनिया Rajeev and Sonia

    ★ मेनका गांधी Menaka Gandhi

    ★ धीरेंद्र ब्रह्मचारी Dhirendra Brahmachari

    ★ गांधी बनाम सिंधिया Gandhi Versus Scindia

    ★ भारतीय जनता पार्टी Bharatiya Janta Party

    ★ इंदिरा बनाम मेनका Indira Versus Menaka

    ★ एन टी रामा राव N T Rama Rao

    ★ एशिअन गेम्ज़ Asian Games

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    इस पुस्तक के लेखक

    प्रवीण कुमार झा / Praveen Kumar Jha
    + लेखक की अन्य किताबें

    डॉ. प्रवीण झा एक सफल सुपरस्पेशलिस्ट डॉक्टर होने के अलावा एक उत्साही व्यंग्यभाषी ब्लॉगर हैं। उनका उपनाम 'वामनगढ़ी' है और उन्होंने कई छोटे हिंदी ब्लॉगों को प्रकाशित किया है, जिसे काफी सराहा गया है। लेखक ने अपना बचपन बिहार में बिताया, और पुणे, नई दिल्ली, बैंगलोर और शिकागो जैसे शहरों में अपने चिकित्सा कैरियर के माध्यम से रवाना हुए। वर्तमान में, लेखक कोंग्सबर्ग, नॉर्वे में रहता है। लेखन के प्रति लेखक की लगन हिंदी में उनकी पहली काल्पनिक पुस्तक- चमनलाल की डायरी के कारण बनी।

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