चिंता छोडो सुख से जियो | CHINTA CHHODO SUKH SE JIYO | HOW TO STOP WORRYING AND START LIVING BY DALE CARNEGIE HINDI PDF DOWNLOAD FREE

जीवन में प्रत्येक व्यक्ति किसी-न-किसी चिंता से ग्रस्त है। चिंता कई प्रकार की होती है। जीवन है तो चिंता है। प्रत्येक चिंता का कोई-ना-कोई समाधान भी अवश्य होता है, लेकिन हम अपनी समस्याओं में इतना घिरे रहते हैं कि चिंता कर-करके परेशान होते रहते हैं। चिंता के साथ बहुत बुरी बात यह है कि यह हमारी एकाग्रता की शक्ति को खत्म कर देती है और स्वस्थ आदमी को भी बीमार बना सकती है। डॉ. अलेक्सिस कैरेल ने कहा था – ‘जो चिंता से लड़ना नहीं जानते, वे जवानी में ही मर जाते हैं।’


अगर आप चिंता रूपी कैंसर से बचना चाहते हैं, तो इस पुस्तक को अवश्य पढ़ें। इस पुस्तक में चिंता की समस्याओं का विश्लेशण कैसे करें और उन्हें कैसे सुलझायें, के व्यावहारिक जवाब दिए गए हैं। इन पर अमल करके आप न सिर्फ अपनी चिंता पर विजय पा सकते हैं, बल्कि खुश व स्वस्थ्य रहकर शांतिपूर्वक अपना जीवन भी जी सकते हैं। इस पुस्तक को पढ़े और चिंता पर विजय प्राप्त कर सुख से जीने का मूलमंत्र जानें। इससे पहले कि चिंता आपको खत्म करे, आप चिंता को खत्म कर दें…।

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इससे पहले कि चिंता आपको खत्म करे
आप चिंता को खत्म कर दें…।

पुस्तक का अंश :

आज को कैसे जिएं

हमारा कार्य यह देखना नहीं है कि दूर धुंधलके में क्या दिखता है, बल्कि वह करना है, जो हमारे सामने है।1871 में बसंत के दिनों में एक युवक ने कोई पुस्तक उठाई और 21 शब्द पढ़े, ऐसे शब्द, जिन्होंने उसके भविष्य पर गहरा असर डाला। वह मेडिकल का छात्र जनरल अस्पताल में था। उसे चिंता सता रही थी कि परीक्षा में कैसे पास हो पाएगा, यदि पास हो भी गया तो करेगा क्या, जाएगा कहां, डॉक्टरी की प्रैक्टिस कैसे शुरू करेगा, रोजगार कैसे चलायेगा।युवक ने 1871 में 21 शब्द पढ़े थे, उनकी सहायता से अपनी पीढ़ी का सबसे प्रसिद्ध डॉक्टर बना। विश्वविख्यात हॉपकिन्स स्कूल ऑफ मेडिसिन शुरू किया। ऑक्सफोर्ड में रेजियस प्रोफेसर भी बने, जो ब्रिटिश राज में किसी भी डॉक्टर का सबसे बड़ा सम्मान है। इंग्लैंड के सम्राट ने ‘नाइट’ का खिताब प्रदान किया। उनकी मृत्यु के बाद जीवन की कहानी के लिए 1466 पृष्ठों के दो बड़ी जिल्दों की आवश्यकता पड़ी।उनको सर विलियम स्तर के नाम से जाना जाता था। वे 21 शब्द जो उन्होंने 1871 के बसंत में पड़े थे। थॉमस कार्यालय के 21 शब्दों से उन्हें ‘चिंतामुक्त’ जीवन जीने में सहायता मिली। ‘हमारा कार्य यह देखना नहीं है कि दूर धुंधलके में क्या दिखता है, बल्कि वह करना है, जो हमारे सामने है।’42 साल बाद, जब सुहानी बसंत की रात कैंपस में ट्यूलिप्स के फूल खिल रहे थे, तो सर विलियम ऑस्लर ने येल विश्वविद्यालय के छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने बताया कि सब को लगता है कि वे चार विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर थे और एक लोकप्रिय पुस्तक के लेखक भी, इसलिए उनके पास ‘खास तरह का विभाग’ होगा। यह सच नहीं है और उनके सभी मित्र भी जानते हैं कि उनका मस्तिष्क ‘बहुत ही औसत दर्जे’ का है।

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