ऐसी वैसी औरत / Aisi Waisi Aurat by Ankita Jain Download Free PDF Hindi

पुस्तक नाम : ऐसी वैसी औरत / Aisi Waisi Aurat
Book Language : हिंदी | Hindi
पुस्तक का साइज़ : 3.58 MB
  • कुल पृष्ठ : 93

  • अंकिता जैन की लघु कहानियों का संग्रह

    “कौन थी? तेरी क्या लगती थी? कहाँ की थी? कोई फोटो? कोई पहचान? कहाँ जा सकती
    है? कबसे ग़ायब है?” सवाल पूछने के बाद थानेदार ने अपनी निगाहें मुझ पर टिका दी हैं
    और मैंने अपनी चप्पलों पर। किसी की सवालिया नज़रों से बचने का इससे सरल उपाय मुझे
    आज तक नहीं सूझा।
    “अरे टाइम खोटी मत कर लड़के, नाम बता उसका,” जब थानेदार ने फटकारते हुए
    कहा, तो मेरा दिमाग़ याददाश्त की वो परतें खरोंचने लगा जिनके नीचे दबा है मालिन भौजी
    का असली नाम, जो मैंने सिर्फ एक बार पूछा था, वो भी किराएदार बनने के शुरुआती दिनों
    में। घर से कुछ सामान मँगाना था। पते के ‘केयर ऑफ़’ में उसका नाम लिखने के लिए जब
    मैंने पूछा, तो हमेशा हाथ में रहने वाले मीठी सुपारी के पैकेट से एक दाना मुँह में डालते हुए,
    अपनी आँखें तरेरते हुए वो बोली थी, “नाम तो हमारा बैजंती है, दिखने में भी हम बैजंती
    माला से कम नहीं, लेकिन शादी के बाद से हमने भी हमारा नाम नहीं सुना… पति माली था
    हमारा, चौक वाले मंदिर में… क़िस्मत उसे तो ले गई, बस हमें ये नाम दे गई- मालिन भौजी…
    तुम अपनी चिट्ठी पे भी यही लिखवा दो, डाकिया बैजंती के नाम से तुम्हारी चिट्ठी वापस न ले
    जाए.. यहाँ कोई हमें बैजंती के नाम से नहीं जानता।” अपनी बात ख़त्म करके जब वो
    ठिलठिलाकर हँसी थी, तो मैं समझ नहीं पाया था कि डाकिए की नासमझी पर हँस रही थी,
    अपनी क़िस्मत पर या इस छोटे-से शहर के उन लोगों पर जिन्होंने बैजंती को नहीं सिर्फ़
    मालिन भौजी को जाना। आज के ज़माने में ये भौजी शब्द जुबान को थोड़ा अजीब लगता है,
    इसलिए मैंने शुरुआत में उसे भाभी पुकारा, फिर धीरे-धीरे सबके साथ मैं भी भौजी पर आ
    गया। उसे भी भौजी ही अच्छा लगता है। वह कहती है, “भाभी पराया लगता है।” वैसे
    मोहल्ले की औरतों के बीच वह फॉल-पीकू वाली के नाम से भी जानी जाती है। अपने इन…

    इस पुस्तक के लेखक

    अंकिता जैन / Ankita Jain

    चम्बल की घाटियों में बसे एक छोटे से गाँव जौरा की रहने वाली अंकिता आजकल सतपुड़ा की वादियों में बसे जशपुरनगर में अपने गृहस्थ जीवन और लेखन दोनों को आनंद ले रही हैं। यूँ तो अंकिता ने बनस्थली विद्यापीठ से कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग में M.Tech करने के बाद CDAC, Pune में साल भर Artificial Intelligence में शोधकार्य किया। फिर भोपाल के बंसल कॉलेज में बतौर प्राध्यापक पढ़ाया भी। लेकिन नौकरी से उखड़े मन ने उन्हें लेखन जगत में ला खड़ा किया। जहाँ उन्होंने बतौर सम्पादक एवं प्रकाशक मासिक पत्रिका ‘रूबरू दुनिया’ का तीन साल प्रकाशन किया। जो अब जल्द ही मोबाइल एप के रूप में पाठकों के बीच होगी। लेखन जगत में अंकिता को उनका पहला ब्रेक फ़्लैश मोब गीत ‘मुंबई143’ से मिला जिसके बोल अंकिता ने लिखे थे। जो सबसे बड़ा फ़्लैश मोब होने की वजह से लिम्का बुक ऑफ़ नेशनल रिकॉर्ड में अपनी जगह बना चुका है। उसके बाद अंकिता की लिखी कहानी को अंतरराष्ट्रीय कहानी लेखन प्रतियोगिता में टॉप टेन में जगह मिली तो उन्हें लगा कि वो थोड़ा-बहुत कहानी लिख सकती हैं। इस ख़याल ने इन्हें बिग एफ़एम के फ़ेमस शो 'यादों का इडियट बॉक्स' एवं 'यूपी की कहानियाँ' तक पहुँचाया। रेडियो पर अब तक अंकिता की दो दर्जन कहानियाँ प्रसारित हो चुकी हैं। 2015 में अंकिता के लिखे पहले अंग्रेज़ी उपन्यास 'The Last Karma' को पाठकों ने पसंद किया। इस संग्रह के साथ अंकिता अपनी पहली हिंदी किताब लेकर आपके समक्ष उपस्थित हैं।

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