द गर्ल इन रूम 105 | The Girl in Room 105 by Chetan Bhagat Download Free PDF

हाय, मैं केशव हूँ, और मेरा जीवन खराब हो गया है। मुझे अपनी नौकरी से नफरत है और मेरी प्रेमिका ने मुझे छोड़ दिया। आह, सुंदर ज़ारा। ज़ारा कश्मीर से है। वह मुस्लिम है। और क्या मैंने आपको बताया कि मेरा परिवार थोड़ा अच्छा है, पारंपरिक है? वैसे भी, कि छोड़ो।

ज़रा और मैं चार साल पहले टूट गए। वह जीवन में आगे बढ़ी। मैंने नहीं किया। मैं उसे भूलने के लिए हर रात पीता था। मैंने सोशल मीडिया पर उसे फोन किया, मैसेज किया और उसे डांटा। उसने सिर्फ मेरी उपेक्षा की।

हालाँकि, उस रात, उसके जन्मदिन की पूर्व संध्या पर, ज़ारा ने मुझे मैसेज किया। उसने मुझे अपने हॉस्टल रूम 105 में पुराने समय की तरह बुलाया। मुझे नहीं जाना चाहिए था, लेकिन मैंने किया … और मेरा जीवन हमेशा के लिए बदल गया।

यह एक प्रेम कहानी नहीं है। यह एक अनगढ़ कहानी है।

फाइव प्वाइंट किसी और 2 स्टेट्स के लेखक से , समकालीन भारत की पृष्ठभूमि के खिलाफ जुनूनी प्रेम और जीवन में उद्देश्य खोजने के बारे में एक तेज-तर्रार, मजाकिया और विवादित थ्रिलर आता है।

हाय मैं हूँ केशव, और मेरी ज़िंदगी की शुरुआत पड़ी हैं |

मुझे अपनी जॉब से नफ़रत है और मेरी गर्लफ्रेंड मुझे छोड़ गई |

आह, ख़ुबसूरत ज़ारा | ज़रासफ़ामी है | ज़ारा मुस्लिम है | और मैंने आपको बताया या नहीं कि मेरी फैमिली थोड़ी-सी ट्रेडिशनल क़िस्म की है? खैर, रहना होगा |

चार साल पहले मेरा और ज़ारा का ब्रेकअप हो गया | वो मूव उन पर कर गई, लेकिन मैं वहीं का वहीं रह गया |

मैं उसकी याद को भुलाने के लिए हर रात ड्रिंक करता था | उसे कॉल करता है, मैसेज करता है, उसका सोशल मीडिया एक्ट एंडज़ पर नज़र बनाए रखता है | और वो? मुझे लगातार इग्नोर करता रहता है | लेकिन, उस रात, अपने जन्मदिन पर, ज़ारा ने मुझे मैसेज किया और अपने हॉस्टल में बुलाया, जैसे पहले बुलाया था | वही कमरा नंबर 105 में | मुझे उस रात वहाँ नहीं जाना चाहिए था, लेकिन मैं गया … और मेरी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल गई |

यह प्रेम कहानी नहीं है | यह कहानी है, उस प्यार की, जो ख़त्म नहीं हो सका |

‘फाइव पॉइंट समवन’ और ‘टू स्टेट्स’ जैसे उपन्यासों के लेखक चेतन भगत की क़लम से इस बार निकली है यह रोमांचक और मज़ेदार कहानी, जो इतनी अच्छी कहानी से आगे बढती है कि एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद आप के बीच नहीं है। छोड़ सकते हैं | यह कहानी है, जुनून की हद तक किए गए प्यार की, और आज के भारत में अपनी ज़िंदगी के मायने तलाशने की

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पुस्तक का कुछ अंश:

छह महीने पहले
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‘स्टॉप, मेरे भाई, स्टॉप,’ सौरभ ने मेरे हाथ से व्हिस्की का गिलास छुड़ाते हुए कहा।
‘मैं नशे में नहीं हूं,’ मैंने कहा| हम मेकशिफ्ट बार के पास ड्राइंग रूम के एक कोने में बैठे हुए थे। कोचिंग क्लास फैकल्टी के बाकी के लोग अरोरा सर के इर्द-गिर्द जमा थे। वे कभी भी उनकी लल्लो-चप्पो करने का मौका नहीं गंवाते थे।
हम चंदन क्लासेस के संचालक और हमारे बाँस चंदन अरोरा के मालवीय नगर स्थित घर पर आए थे।
‘तुमने मेरी क़सम खाई थी कि तुम दो ड्रिंक से ज़्यादा नहीं पीओगे,’ सौरभ ने कहा।
मैं उसे देखकर मुस्करा दिया।
‘हां, लेकिन मैंने ड्रिंक्स की साइज़ तो तय नहीं की थी ना? एक ड्रिंक में आधी बोतल भी तो पी जा सकती है, मेरी आवाज़ लड़खड़ा गई। मैं खुद ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा था।
‘तुम्हें ताजी हवा की ज़रूरत है। चलो बालकनी में चलते हैं,’ सौरभ ने कहा।
‘मुझे केवल ताज़ी व्हिस्की की ज़रूरत है,’ मैंने कहा।
सौरभ मेरी बांह पकड़कर मुझे खींचते हुए बालकनी में ले गया। मुझे तो यक़ीन ही नहीं हुआ कि शुलशुल शरीर वाला यह इंसान इतना ताक़तवर कब से हो गया था।
‘यहां तो कड़ाके की सर्दी है,’ मैंने ठंड से कांपते हुए कहा। अपने आपको गर्म बनाए रखने के लिए मैं अपनी हथेलियों को मलने लगा।
‘भाई, तुम्हें इतनी नहीं पीनी चाहिए।’
‘यह न्यू ईयर ईव है। तुम तो जानते ही हो इस तारीख को मुझे क्या हो जाता है।’
‘वो अब बीती बात हो गई है। वार साल पुरानी। अभी साल 2018 लगने जा रहा है।’
‘लगता है जैसे चार पल पहले की बात हो,’ मैंने कहा।….

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