गुनाहो का देवता | Gunaho ka devta Hindi PDF Download By Dharmveer Bharati

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Gunaho Ka Devta upanyas pdf Hindi: धर्मवीर भारती द्वारा लिखित उपन्यास शुरुआती दिनों में सबसे ज्यादा पढ़ा जाने वाले उपन्यासो में से एक है इस उपन्यास को धर्मवीर भारती जी ने सबसे पहले 1959 में प्रकाशित किया था और यह उपन्यास भरतीय भाषा में सबसे अधिक बिकने वाले उपन्यासो में से एक है आज भी लाखो पाठको द्वारा इस नॉवेल की मांग आज भी वैसे ही बानी हुई है जैसे प्रकाशन के प्रारंभिक वर्षो में थी. इस उपन्यास में प्रेम के अव्यक्त और अलौकिक रूप का एक और चित्रण है अब तक इसके सौ से ज्यादा संस्करण छप चुके है.

Short Summary In Hindi

इस कहानी का ठिकाना अंग्रेजों के समय का इलाहाबाद रहा है। कहानी के तीन मुख्य पात्र हैं : चन्दर , सुधा और पम्मी। पूरी कहानी मुख्यतः इन्ही पात्रों के इर्दगिर्द घूमती रहती है। चन्दर सुधा के पिता यानि विश्वविद्यालय के प्रोफेसर के प्रिय छात्रों में है और प्रोफेसर भी उसे पुत्र तुल्य मानते हैं। इसी कारण चन्दर का सुधा के यहाँ बिना किसी रोकटोक के आना-जाना लगा रहता है। धीरे-धीरे सुधा कब दिल दे बैठती है, यह दोनों को पता नहीं चलता। लेकिन यह कोई सामान्य प्रेम नहीं था। यह भक्ति पर आधारित प्रेम था। चन्दर सुधा का देवता था और सुधा ने हमेशा एक भक्त की तरह ही उसे सम्मान दिया था।

चंदर सुधा से प्रेम तो करता है, लेकिन सुधा के पापा के उस पर किए गए अहसान और व्यक्तित्व पर हावी उसके आदर्श कुछ ऐसा ताना-बाना बुनते हैं कि वह चाहते हुए भी कभी अपने मन की बात सुधा से नहीं कह पाता। सुधा की नजरों में वह देवता बने रहना चाहता है और होता भी यही है। सुधा से उसका नाता वैसा ही है, जैसा एक देवता और भक्त का होता है। प्रेम को लेकर चंदर का द्वंद्व उपन्यास के ज्यादातर हिस्से में बना रहता है। नतीजा यह होता है कि सुधा की शादी कहीं और हो जाती है और अंत में उसे दुनिया छोड़कर जाना पड़ता है।

पम्मी के साथ चंदर के अंतरंग लम्हों का गहराई से चित्रण करते हुए भी लेखक ने पूरी सावधानी बरती है। पूरे प्रसंग में थोड़ा सेक्सुअल टच तो है, पर वल्गैरिटी कहीं नहीं है, उसमें सिहरन तो है, लेकिन यह पाठकों को उत्तेजित नहीं करता। लेखक खुद इस उपन्यास के कितने नजदीक हैं, इसका अंदाजा उनके इस कथन से लगाया जा सकता है।

About The Author

धर्मवीर भारती जी का जन्म 25 दिसंबर 1926 में इलाहबाद के अतर सुइया मुहल्ले में एक कायस्थ परिवार में हुआ था भारती जी को प्रेम और रोमांस का उपन्यासकार भी माना जाता है क्योकि उनके उपन्यासो में प्रेम और रोमांस के तत्वों का भरपूर समायोजन भली प्रकार से किया होता है धर्मवीर भारती जी को अपने जीवन काल में कई प्रकार के पुरुष्कारो से सम्मानित किया गया है जैसे की 1972 में पद्मश्री से अलंकृत, 1984 में हल्दी घाटी श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार, महाराष्ट्र गौरव महाराष्ट्र सरकार 1994 में आदि सम्मान। उनके प्रमुख उपन्यासो में नाहों का देवता, सूरज का सातवां घोड़ा, ग्यारह सपनों का देश, प्रारंभ व समापन सम्मिलित है.

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